Thursday, December 12, 2019

उद्देश्य के आधार पर लेखांकन के प्रकार क्या है ?

उद्देश्य के आधार पर लेखांकन के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं :
  • वित्तीय लेखांकन (Financial Accounting) : वित्तीय लेखांकन वह लेखांकन है जिसके अंतर्गत वित्तीय प्रकृति वाले सौदों को लेखाबद्ध किया जाता है। इन्हें सामन्य लेखाकर्म भी कहते हैं और इन लेखों के आधार पर लाभ-हानि या आय विवरण तथा चिट्ठा तैयार किया जाता है।
  • लागत लेखांकन (Cost Accounting) : लागत लेखांकन वित्तीय लेखा पद्धति की सहायक है। लागत लेखांकन किसी वस्तु या सेवा की लागत का व्यवस्थित व वैज्ञानिक विधि से लेखा करने की प्रणाली है। इसके द्वारा वस्तु या सेवा की कुल लागत तथा प्रति इकाई लागत का सही अनुमान लगाया जा सकता है। इसके द्वारा लागत पर नियंत्रण भी किया जाता है। यह उत्पादन, विक्रय एवं वितरण की लागत भी बताता है।
  • प्रबंध लेखांकन (Management Accounting) : यह लेखांकन की आधुनिक कड़ी है। जब कोई लेखा विधि प्रबंध की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करती है, तब इसे प्रबंधकीय लेखाविधि कहा जाता है।

लेखांकन के उद्देश्य क्या है ?

लेखांकन के निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य है -

  • लेखांकन का प्रथम उद्देश्य सभी व्यावसायिक लेन-देनों का पूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से लेखा करना है। सुव्यवस्थित ढंग से लेखा करने से भूल की संभावना नहीं रहती और परिणाम शुद्ध प्राप्त होता है।
  • लेखांकन का दूसरा उद्देश्य एक निश्चित अवधि का लाभ-हानि ज्ञात करना है।
  • लेखांकन का एक उद्देश्य संस्था की वित्तीय स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त करना है।
  • लेखांकन का एक कार्य वित्तीय वाली सूचनाएँ प्रदान करना है जिससे प्रबंधकों को निर्णय लेने में सुविधा हो, साथ ही सही निर्णय लिये जा सकें। इसके लिए वैकल्पिक उपाय भी लेखांकन उपलब्ध कराता है।
  • व्यवसाय में कई पक्षों के हित होते हैं, जैसे कर्मचारी वर्ग, प्रबंधक, लेनदार, विनियोजक आदि। व्यवसाय में हित रखने वाले विभिन्न पक्षों को उनसे संबंधित सूचनाएँ उपलब्ध कराना भी लेखांकन का एक उद्देश्य है।

लेखांकन के कार्य क्या है ?

लेखांकन के छः कार्य निम्नलिखित है :
  1. लेखात्मक कार्य (Recordative Function) :
    लेखांकन का यह आधारभूत कार्य है। इस कार्य के अन्तर्गत व्यवसाय की प्रारम्भिक पुस्तकों में क्रमबद्ध लेखे करना, उनकों उपयुक्त खातों में वर्गीकृत करना अर्थात उनसे खाते तैयार करना और तलपट बनाने के कार्य शामिल हैं।
  2. व्याख्यात्मक कार्य (Interpretative Function) :
    इस कार्य के अंतगर्त लेखांकन सूचनाओं में हित रखने वाले पक्षों के लिए वित्तीय विवरण व प्रतिवेदन का विश्लेषण एवं व्याख्या शामिल है। तृतीय पक्ष एवं प्रबंधकों की दृष्टि से लेखांकन का यह कार्य महत्वपूर्ण माना गया है।
  3. संप्रेषणात्मक कार्य (Communicating Function) :
    लेखांकन को व्यवसाय की भाषा कहा जाता है। जिस प्रकार भाषा का मुख्य उद्देश्य सम्प्रेषण के साधन के रूप में कार्य करना है क्योंकि विचारों की अभिव्यक्ति भाषा ही करती है, ठीक उसी प्रकार लेखांकन व्यवसाय के वित्तीय स्थिति व अन्य सूचनाएँ उन सभी पक्षकारों को प्रदान करता है जिनके लिए ये आवश्यक हैं।
  4. वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना (Meeting Legal Needs) :
    विभिन्न कानूनों जैसे - कम्पनी, अधिनियम, आयकर अधिनियम, बिक्री कर अधिनियम, आदि द्वारा विभिन्न प्रकार के विवरणों को जमा करने पर बल दिया जाता है। जैसे - वार्षिक खाते, आयकर रिर्टन, बिक्रीकर रिर्टन आदि। ये सभी जमा किये जा सकते हैं यदि लेखांकन ठीक से रखा जाए।
  5. व्यवसाय की सम्पत्तियों की रक्षा करना (Protecting Business Assets) :
    लेखांकन का एक महत्वपूर्ण कार्य व्यवसाय की सम्पतियों की रक्षा करना है। यह तभी सम्भव है, जबकि विभिन्न सम्पतियों का उचित लेखा रखा जाये।
  6. निर्णय लेने में सहायता करना (Facilitating Decision Making) :
    लेखांकन महत्वपूर्ण आँकड़े उपलब्ध कराता है जिससे निर्णयन कार्य में सुविधा होती है।

लेखांकन के लाभ क्या है ?

लेखांकन के निम्नलिखित लाभ है :
  • कोई भी व्यक्ति कितना भी योग्य क्यों न हो, सभी बातों को स्मरण (याद) नहीं रख सकता है। व्यापार में प्रतिदिन सैकड़ों लेन-देन होते हैं, वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। ये नकद और उधार दोनों हो सकते हैं। मजदूरी, वेतन, कमीशन, आदि के रूप में भुगतान होते हैं। इन सभी को याद रखना कठिन है। लेखांकन इस आभाव को दूर कर देता है।
  • लेखांकन से व्यवसाय से संबंधित कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त होती हैं जैसे :
    लाभ-हानि की जानकारी होना।
    सम्पत्ति तथा दायित्व की जानकारी होना ।
    कितना रुपया लेना है और कितना रुपया देना है ।
    व्यवसाय की आर्थिक स्थिति कैसी है, आदि।
  • अन्य व्यापारियों से झगड़ें होने की स्थिति में लेखांकन अभिलेखों को न्यायालय में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। न्यायालय प्रस्तुत किये लेखांकन को मान्यता प्रदान करता है।
  • वित्तीय लेखा से कर्मचारियों के वेतन, बोनस, भत्ते, आदि से संबंधित समस्याओं के निर्धारण में मदद मिलती है।

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